कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा के रखा हुआ है,और अनुमानतः 213 देशों को अब तक अपने चपेट में ले चूका है। भारत में भी यह तेजी से फैल रहा है, यहाँ के डॉक्टरों का कहना है की भारत में जून और जुलाई के महीनों में कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस में और ज्यादा बढ़ोतरी होगी, यह संख्या कहाँ तक जाएगी इसका अनुमान लगाना कठिन है। ऐसे तो कोरोना वायरस एक वैश्विक महामारी के रूप में अब तक आर्थिक और सामाजिक दृश्टिकोण से बहुत ही नुकसानदेह साबित हुआ हुआ है और भविष्य में इसके और भी कई दुर्लभ परिणाम आने वाले हैं जैसे लाखों लोगों की जान भुखमरी, वैश्विक आर्थिक मंदी,आर्थिक तंगी, बेरोजगारी इत्यादी। जहाँ कोरोना वायरस के चलते बहुत बुरा घटित हो रहा है लेकिन इससे कुछ अच्छा भी हो रहा है जैसे पर्यावरण में सुधार, वायु प्रदूषण में कमी, ओजोन परत में सुधार,जानवरों का खुले में घूमना आदि।आइये कोरोना वायरस - बहुत बुरा तो कितना अच्छा साबित हुआ है कुछ तथ्य जो आपको समझने में आसानी होगी।
1. कोरोना वायरस - बुरा, बहुत बुरा
A. लाखों लोगों की जान गई : इस वैश्विक महामारी से लाखों लोगों की जान चली गई है अब तक के आंकड़े यह बताते हैं कि पूरे विश्व में लगभग 4.44 लाख ( 24 मई तक ) लोग मारे जा चुके हैं और जहां तक भारत की बात है तो भारत में अब तक लगभग 3876 लोग मारे जा चुके हैं यह संख्या और कितनी आगे जाएगी यह बताना कठिन है।
B. आर्थिक संकट एवं बेरोजगारी : अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने अपनी रिपोर्ट ‘आईएलओ निगरानी- दूसरा संस्करण : कोविड-19 और वैश्विक कामकाज’ में कोरोना वायरस संकट को दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे भयाक संकट बताया है। पुरे विश्व में करोड़ो लोगों की नौकरी जा चुकी है, भारत के बारे में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का अनुमान है की 40 लाख नौकरियां ख़तम हो जाएगी जिसमे सबसे ज्यादा असर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पे पड़ेगी। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर मात्र 5% रह जाएगी, तो वहीं 2020-21 में तुलनात्मक आधार पर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में भारी गिरावट आएगी जो घटकर मात्र 2.8% रह जाएगी।आने वाले दिनों में भारत में सबसे ज्यादा समस्या भुखमरी और बेरोजगारी की होगी तो ऐसे में देखना है सरकार इस समस्या से कैसे निपटती है।
1. कोरोना वायरस - कुछ अच्छा भी... .
A. पर्यावरण में सुधार (प्रकृति फिर मुस्कुराई) - एक ओर जहां तालाबंदी से पूरी दुनिया थम सि गई है और सभी लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं वहीं प्रकृति अपना रंग बिखेर रही है, चिड़ियों का चहचहाना फिर से गूंजने लगा है।आजकल लोगों की नींद अलार्म से नहीं चिड़िओं की शोर से खुलती है। सड़क किनारे पौधे जहां धूल और गंदगी से मायूस पड़े होते थे वही पौधे अब मुस्कुराने लगे हैं। नासा के अध्ययन के मुताबिक, भारत में वायु प्रदूषण 20 साल में सबसे कम स्तर पर है,अमूमन भारत के सभी बड़े शहरों का यह हाल है कि अभी आसमान नीला साफ सुंदर और शुद्ध हवा का आनंद ले रहें हैं। दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर काफी घट गया है. बीते जाड़ें में दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 500 से 600 के बीच था. यह घटकर 50 पर आ गया है और इसके अलावा वाहनों के शोर ने ध्वनि प्रदूषण में प्रभावी कमी कर दी है। वही मुम्बई का भी एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 से कम स्तर पर पहुंच गया है।
कोरोना वायरस से, भारत सहित कई देशों में तालाबंदी हो चुका है , इससे पर्यावरण को भी काफी फायदा पहुंचा है पिछले कई दशकों से पृथ्वी पर हमारी रक्षा कर रही ओजोन परत को जो उद्योगों एवं गाड़ियों से नुकसान पहुंच रहा था उसमें कमी आने से इसकी हालत में सुधार आ रहा है। ओजोन परत को सबसे ज्यादा नुकसान अंटार्कटिका के ऊपर हो रहा था वैज्ञानिकों ने पाया है कि इस परत में अब उल्लेखनीय सुधार आ रहा है. नेचर में प्रकाशित ताजा शोध के अनुसार जो केमिकल ओजोन परत के नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं, उनके उत्सर्जन में कमी होने के कारण यह सुधार हो रहा है।
B. गंगा एवं अन्य नदियों के पानी की गुणवत्ता में सुधार : IIT बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के Professor Dr PK Mishra का कहना है कि इतने दिनों में गंगा में पानी की गुणवत्ता में 40-50% सुधार हुआ है वही दूसरी ओर नमामि गंगे परियोजना के एक अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पवित्र गंगा का निर्मल जल आज भी अपने उदगम स्थल पर स्वच्छ, औषधीय एवं पारदर्शी है, परंतु मानव ने अपने लाभ एवं गैर जिम्मेदाराना हरकत से उसे प्रदूषित कर दिया है। जब लॉकडाउन के कारण गंगा में औद्योगिक कचरे एवं अन्य गंदे पदार्थों का गिरना, स्नानादि बंद हो गया तो एक बार फिर गंगा का पवित्र जल अपने उदगम स्थल से गंगासागर तक मलिन से निर्मल हो गया है । वैसा ही कुछ हाल दिल्ली में बहती यमुना नदी की है तालाबंदी के कारण से साफ हो गई है और बाकी महानगर कि की नदियां भी स्वच्छ और संतोषजनक स्तर पर पहुंच गई है। यही सूचना इटली से भी है जहाँ सबसे खूबसूरत शहर वेनिस के नहर का पानी फिर से स्वच्छ हो गया है.
अब देखना दिलचस्प यह होगा कि चिड़ियों की चहचहाना, यूँ प्रकृति की मुस्कुराना, नीला आसमान और शुद्ध हवा में साँस लेना या गंगा एवं दूसरी नदिओं की पानी साफ होना कब तक रहेगी। क्योंकि आखिरकार जिंदगी को कुछ दिन के बाद पटरी पर तो लौटना ही है फिर से वही सड़कों पर गाड़ियों की दौड़, कल कारखानों का चालू होना ,वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण का फैलाव जारी रहेगा। तो सवाल यह उठता है कि क्या प्रकृति फिर से मुरझा जाएगी,शायद और नहीं भी यह हम सभी मानव के हाथ में हैं हम चाहेंगे तो प्रकृति इसी तरह मुस्कुराते रह सकती है और शायद प्रकृति इसी तरह मुस्कुराती रहे तो कोरोना जैसी बीमारी और महामारी कभी भविष्य में नहीं आएगी। पर्यावरण को बचाना हम सभी का मानव धर्म है।



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