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रविवार, 25 अप्रैल 2021

कोरोना की कैद से कैसे मिलेगी आजादी : how will we get freedom from corona in hindi

    एक बार फिर कोरोना से देश का बुरा हाल हो गया है. दूसरी लहर इसे कहा जा रहा है , जो पहले से ज्यादा खतरनाक है . ये सच भी है आंकड़े कुछ ऐसाही बताते है. इन सब बातो के बारे में सोचते है तो एक अलग ही डर और खौफ मन  में भर जाता है साथ ही मन में बहुत सवाल उठते है जो बार बार यही पूछते है की हमने कितनी तरक्की कर ली , हम कितने मोडर्न बन गये. या फिर हमारा विकास ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन बन गया . हमने विकास करने के लिये कुदरत के साथ जो खिलवाड़ किया वोही कुदरत आज हमसे हिसाब मांग रही है . हमने अपनी ही हवा में खुद जहर घोल दिया जिससे हमें खुली हवा में निकलने से भी परहेज करना पड़ रहा , मास्क के बिना साँस लेने में खतरा महसूस होने लगता है . क्या यही फ्यूचर देने के लिये हम अपने बच्चो को विकास का पाठ पढ़ा रहे और  विकसित देश का निर्माण करने में लगे है . जहा हम अपने मासूमो को एक खुली जगह भेज नही सकते उसे बहार निकलने देने से और स्कुलो में भेजने से भी डर लगने लगता है  ऐसा विकास किस काम का ? अब एक बात को ही हम ले लेते है , जब हम अपना मकान बनाने की सोचते है तो उसके रास्ते में आने वाले सभी पेड़ पौधों को काटने में थोडा भी नहीं सोचते क्योंकि घर बनना जरुरी है हमारा विकास होना जरुरी है. इसी तरह ना जाने कितने ही बड़ी इमारते बनी और कितने ही पेड़ पौधे नष्ट हो गये , कितने ही फैक्टरिया ,पावर प्लांट्स ,  केमिकल प्लांट्स और ऐसेही अनगिनत योजनाये जो विकास कहलाती है उन्होंने कुदरत का समतोल बिगाड़ा ,इन सब के बावजूद कुदरत अपनी मेहरबानी बरसाती रही और तरक्की की राह से हटती चली गयी  और हम अपने विकास के काम को आगे बढ़ाते चले गए .

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      मगर इस बार ना जाने क्या हुआ ऐसी कोनसी खोज ये दुनिया करने चली थी जिससे कुदरत का संतुलन इस कदर बिगाड़ दिया की हमारे प्राणवायु में ही जहर भर गया. शायद ये अबतक की सबसे बड़ी लापरवाही है जिसकी सजा हर कोई भुगत रहा है. हमारे देश में ऐसे हालत शायद ही कभी देखने मिले होंगे, घरों के कैद से आजादी की ये लड़ाई कब तक चलेगी कोई नहीं जनता . इस  दुनिया में आ चुकी मासूमियत खुद नई दुनिया में कैसे निकल पायेगी कोई नहीं जानता. घर के चार दीवारों से बाहर भी क्या उसकी नई दुनिया से हम उसे जल्दी मिला पाएंगे , बेझिजक दुनिया घुमने की उसकी इच्छाओ को  पूरा कब कर पाएंगे .

             मॉडर्न सोसायटी ने रिश्तो  की अहमियत को पहले से ही कम कर दिया था फिर भी रिश्ते किसी कारण वश निभाए जाते रहे . लेकिन ये कैसी विपदा है जहा अपने अपनो  का साथ  देने से भी  कतराने लगते  है इस बीमारी की सावधानिया  इसकी इजाजत भी नहीं देती. संक्रमण का तेजी से फैलाव ऐसा करने से रोक देता है. बहुत ही कठिन विडंबना है.

              

           कोरोना की इस आफत से सबकी जिन्दगिया थम सी गयी है जिन्दगी के अलावा किसी और बारे में सोचा भी नहीं जाता. उपर से लॉकडाउन की अलग मार लोगो की मुसीबते बढ़ाता है. जिससे गरीबी और भुकमरी लोगो को बाहर निकलने को मजबूर करती है . भुकमरी की आग उस खतरनाक वायरस का डर भी भुला देती है,  क्योंकि खाली पेट कोई भी जंग जीती नहीं जाती इसिलिये  पहले वो पेट भरने की जंग से पहले लड़ते  है . आज भी कई अपने अपनो से दूर होंगे ,इस आफत के ख़त्म  होने का इंतजार करते अपने हिम्मत को थोड़ी और हिम्मत देते, जिन्दगी में आगे बढने की कोशिश करते , की शायद कोरोना की कैद से आजादी मिल जाये हमारे इस महान देश को.     

            इसमें कोई शक नहीं है के इस महासंकट में हमारा बहुत बड़ा योगदान है . तो क्या इससे बाहर निकलने में हम अपना योगदान  नहीं दे सकते . अकेले सरकार इसे कम नहीं कर सकती. सावधानी ही इसका एकमात्र रास्ता है. बार बार सरकार   दिशा निर्देश जारी करती है वो हमारे भलाई के लिये ही करती है. उन निर्देशों का पालन करना भी हमारी सुरक्षा के लिये बहुत जरुरी है

      . इसी के साथ चलिए आपको बताते कुछ ऐसी बाते जो कोरोना की कैद से आजादी दिलाने में असरदार साबित हो सकते है.

सबसे पहले सरकार  के निर्देशों का पालन करना एकमात्र रास्ता है इस संकट को दूर करने का . इसमें मास्क पहनना , बार बार साबुन से हाथ धोना , दो गज दुरी जैसे नियम है. इन्हें अपनाना बेहद ही जरुरी है . साथ ही भीड़ ना करना ,सैनीटाईजेशन भी शामिल है . ये कुछ सरल उपाय हम कर ले तो बड़ी मुसीबत से बच सकते है.            

अपनी जिम्मेदारी निभाकर लोगो की सुरक्षा करना . जब हम अपना कर्तव्य ठीक से निभाएंगे तभी अपने साथ दुसरो की सुरक्षा कर पाएंगे. कभी कभी हमे लगता है ये सब हमारा कुछ नई बिगाड़ सकता , जो होना है वो होगा, मगर इस लापरवाही से हम अपने साथ साथ दुसरे  लोगो को भी खतरे में डाल देते है जो हमसे जुड़े होते है. क्योंकि ये एक संक्रमण है एक दुसरे के सम्पर्क में आने से फैलता है. इसीलिए  हमे अपनी जिम्मेदारी अछेसे निभाना जरुरी है.



       
                                                                  
          

स्वदेशी को अपनी  ताकत बनाना  होगा. हमारा देश एक महान देश है . योग से लेकर आयुर्वेद तक इसकी एक विशाल विरासत हमे मिली हुई है दुनिया भी हमारे नुस्खो और तरीको को आ जमाती है. आज हम अपनी इमुनिटी बढ़ने के लिये जो उपाय करते है वे सब आयुर्वेद से ही तो जुडी है. चाहे वो तुलसी का काढ़ा हो  , गिलोय ,हल्दी ,अश्वगंधा जैसी जड़ी बूटिया हो ये सब हमारी ताकत बढाती है और आसानी से अपनाई  भी जा सकती है . इसीतरह योग भी लाभदायक है. सुबह प्राणायाम और श्वास से जुडी योगक्रिया बेहद असरदार होती है.  

 

पर्यावरण और कुदरत का संतुलन बनाये रखने में सहयोग करना होगा . हवा का स्तर ख़राब होना, पानी दूषित होना, पेड़ पौधों का कम होना, असमय मौसम में बदलाव, खानपान  का स्तर गिरना ,खाने पिने की चीजो से कुदरती हटाकर कृत्रिम मिलावट, हर चीज में दवाइयाँ , खाद , रसायन इन  चीजो का इस्तेमाल  जिम्मेदार है हमे एक अच्छी रोगप्रतिरोधक क्षमता ना देने में. जिससे हमारे शरीर का संतुलन तो बिगाड़ ही रहे साथ ही कुदरत का भी  संतुलन बिगाड़ रहे है , इसीलिए  हमे अपनी जिम्मेदारी समजते हुए कुछ ऐसे कदम उठाते  रहने चाहिए जो पर्यावरण को सुरक्षित रख सके. जैसे पौधे लगाना , स्वच्छता रखना,कुदरती चीजो का इस्तेमाल ज्यादा करना, अन्न की बर्बादी से बचना , विघटन शील वस्तुओ का इस्तेमाल आदि . कुदरत  हमारे जीवन का अभिन्न अंग है. जिनके बिना जीवन मुश्किल दौर से गुजरने लगती है. जैसे आज गुजर रही है .

             
                                                           

 तो आइये ,अपनी इस धरती को फिर से हराभरा और खुशहाल बनाए, इसे प्रदुषण की कैद से छुड़ाए  और अपने जीवन को कोरोना की कैद से.

 

                                                    जीवन के किताब के पन्ने से...........................

 


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